Sawan ke Somwar – सावन के सोमवार

हिन्दू धर्म के अनुयायी सावन के महीने को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। श्रावण मास शिव भगवान की भक्ति में लिप्त होने के लिए उपयुक्त माना गया है। वैसे तो सावन का पूरा महीना ही भगवान शिव को अर्पित है परंतु सावन के सोमवार को अलग ही स्थान प्रदान किया गया है। सावन के महीने में शिवभक्त कई उपवास करते हैं। इनमे सावन के सोमवार सबसे महत्वपूर्ण व्रत हैं।

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Saawan Somwar Dates 2016

2016 में सावन के सोमवार की तिथियां

पूर्णिमांत कैलेंडर मानने वाले प्रदेशों में सावन के सोमवार की तिथियां

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार आदि उत्तर भारत के प्रदेशों में सावन के सोमवार की तिथियां निम्नलिखित हैं:

20 जुलाई (बुधवार) 2016 से श्रावण मास का प्रारंभ है।

  • 25 जुलाई    सावन का पहला सोमवार
  • 1 अगस्त      सावन सोमवार व्रत
  • 8 अगस्त      सावन सोमवार व्रत
  • 15 अगस्त     सावन का अंतिम सोमवार

18 अगस्त (गुरूवार) को श्रावण मास का अंतिम दिन है।

18 अगस्त 2016 को ही रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्यौहार भी है।

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उपरोक्त तिथियां पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार हैं जो उत्तर भारत के प्रदेशों में प्रचलित है।

कई अन्य प्रदेश, विशेषतः दक्षिण एवं पश्चिम भारत के प्रदेश अमावस्यांत कैलेंडर को मानते हैं अतः इन प्रदेशों में सावन के सोमवार की तिथियां भिन्न होती हैं।

अमावस्यांत कैलेंडर मानने वाले प्रदेशों में सावन के सोमवार की तिथियां

आंध्र प्रदेश,  कर्नाटक, तमिल नाडू, गोआ, महाराष्ट्र,  और गुजरात में सावन के सोमवार की तिथियां निम्नलिखित हैं:

3 अगस्त  (बुधवार) से 2016 का श्रावण मास प्रारंभ है।

  • 8 अगस्त             सावन का पहला सोमवार
  • 15 अगस्त           सावन सोमवार व्रत
  • 22 अगस्त          सावन सोमवार व्रत
  • 29 अगस्त          सावन सोमवार व्रत

1 सितंबर (गुरूवार) को श्रावण मास का अंतिम दिन है।

सावन के सोमवार का व्रत एवं व्रत विधि

सावन के सोमवार के व्रत से सम्बंधित तथ्य

भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिया भक्त कई तरह के उपवास सावन के महीने में करते हैं परंतु सावन के सोमवार के व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माने गए हैं।

  • ऐसा माना जाता है कि जो सावन के सोमवार के व्रत करता है उस के सारे दुःख व कष्ट मिट जाते हैं। वह धन एवं सौभाग्य प्राप्त करता है एवं उसकी सारी  मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • यदि कुंवारी कन्याएं सावन के सोमवार का व्रत रखतीं हैं तो उन्हें विवाह उपरान्त आदर्श पति प्राप्त होते हैं।
  • यदि विवाहित महिलाएं सावन में सोमवार के व्रत करती हैं तो उन्हें दीर्घायु प्राप्त होती है एवं उनके पति एवं संतान को सब तरह से सुख प्राप्त होता है।
  • यदि पति – पत्नी साथ में सावन के सोमवार के व्रत का पालन करते हैं तो उनका वैवाहिक जीवन सुखी होता है।

भगवान शिव को भोलेनाथ इसीलिए कहा जाता है क्योंकि वे भक्तों पर बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं।  इसीलिए सावन के सोमवार के सरल व्रत करने से सभी को सौभाग्य एवं सुख की प्राप्ति होती है, ऐसा हमेशा से ही माना जाता रहा है।

वैसे तो सावन के सभी सोमवारों को व्रत रखना शुभ माना जाता है परन्तु कई भक्त केवल प्रथम व अंतिम सोमवार को ही व्रत का पालन करते हैं।  भोलेनाथ अपने सरल स्वभाव के कारण इतने में ही प्रसन्न हो जाते हैं, ऐसा भी माना जाता है।

सावन के सोमवार का व्रत कैसे करें

सावन के सोमवार का व्रत रखने पर सारे दिन कुछ ना खाएं एवं शिव भगवान् का चिंतन मनन करें।  सुबह शाम शिव जी की पूजा अर्चना के उपरान्त सात्विक खाना खाएं।

  • श्रावण मास के सोमवार के दिन प्रातः शीघ्र उठें एवं स्नानादि नित्य कर्म कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • तत्पश्चात घर के निकट शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग की पूजा अर्चना करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। फूल, बिल्वपत्र, बेल फल, एवं आप के इच्छानुसार अन्य फल भी शिवजी को अर्पण कर सकते हैं।
  • घर पर भी शिव पूजा करें।  इस के लिए पूजा स्थान को साफ़ कर शिव जी के चित्र अथवा उनकी मूर्ति की स्थापना करें।  यदि आप के पूजाघर या पूजास्थान पर पहले से ही शिवजी की प्रतिमा या चित्र स्थापित है तो उसी की पूजा करें।
  • दिया धूप आदि  जलाएं एवं ध्यान मुद्रा में बैठ कर शिव का चिंतन करें।
  • मन ही मन शिव मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।  यदि आप चाहें तो आवाज़ के साथ भी शिव मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं।  प्रचलित रूप से 108 बार शिव मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है परंतु आप अपनी इच्छानुसार जितनी बार चाहें, भगवान शिव का ध्यान कर मंत्र जाप कर सकते हैं।
  • संध्या के समय एक बार फिर स्नान करें अथवा अच्छी तरह से हाथ पैर धो कर पुनः शिव की पूजा स्तुति करें।
  • शिव जी को फल इत्यादि का भोग लगाएं।
  • सोमवार व्रत कथा का पाठ करें अथवा इस व्रत कथा को सुनें।
  • परिवार के सदस्यों एवं दोस्तों, पड़ोसियों के साथ मिल कर शिव जी की आरती गायें।
  • अब शिवजी को चढ़ाए गए भोग का प्रसाद सभी को दें।
  • तत्पश्चात स्वयं प्रसाद गृहण करें एवं सात्विक खाना खा कर सोमवार का व्रत समाप्त करें।

सावन के सोमवारों पर इसी प्रकार शिव जी की पूजा अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करें एवं स्वयं सुख और शांति का अनुभव लें।

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