Guru Purnima in Hindi- गुरु पूर्णिमा

कहते हैं, “गुरु गोबिंद दोउ खड़े काके लागूँ पाय, बलिहारी गुरु आपने गोबिंद दियो दिखाए। ”

गुरु को हिन्दू धर्म में भगवन से भी ऊँचा पद प्रदान किया गया है. गुरु हमें आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर हमें परमात्मा के समीप जाने में सहायता करते हैं. शायद इसीलिए गुरु को सर्वोपरि माना जाता है, और इसीलिए आषाढ की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. आषाढ़ मास अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जुलाई अगस्त के महीने में होता है।

गुरु पूर्णिमा तिथि 2016

इस साल आषाढ़ पूर्णिमा 19 जुलाई 2016 को है अतः गुरु पूर्णिमा भी इसी दिन मनाई जायेगी।

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गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है ?

गुरु पूर्णिमा का एकमात्र उद्देश्य है गुरु को सम्मान प्रदान करना पर गुरु को नमन करने के लिए आषाढ़ पूर्णिमा का ही दिन क्यों निश्चित किया गया है, इस विषय में कुछ प्रचलित मान्यताओं को यहाँ बताने का प्रयास किया गया है।

  • आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महाभारत के रचयिता, श्री कृष्ण द्वैपायन व्यास जिन्हें हम श्री वेद व्यास के नाम से जानते हैं, का जन्म हुआ था। इसी कारणवश गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।
  • इसी दिन यानि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन वेद व्यास जी ने हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ ‘वेद’ को चार भागों में विभाजित किया था। चरों वेदों अर्थात ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद एवं अथर्ववेद की व्याख्या भी वेद व्यास जी द्वारा की गयी थी। चार भागों में विभाजित होने के बाद आम आदमी के लिए वेदों को समझना बहुत आसान हो गया। इस कारण से वेद व्यास जी को सर्वोच्च गुरु कह कर बुलाया गया और उनके सम्मान में इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाने लगा। प्रत्येक गुरु में गुरु वेद व्यास का अंश मान कर हम अपने गुरुओं की पूजा गुरु पूर्णिमा के दिन करने लगे।
  • बुद्ध धर्म को मानने वाले लोग भी गुरु पूर्णिमा मनाते हैं। माना जाता है कि इसी दिन बुद्ध भगवान् ने अपना पहला प्रवचन सारनाथ में दिया था जो कि उत्तर प्रदेश में स्थित है।

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गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है ?

प्राचीन काल में विद्यार्थी आश्रम में रहकर अपने गुरु से शिक्षा प्राप्त करते थे एवं गुरु यह शिक्षा निःशुल्क प्रदान किया करते थे। अतः गुरु पूर्णिमा के दिन सभी शिष्य श्रद्धा भाव से अभिभूत हो कर गुरु की वंदना करते थे एवं गुरु को दक्षिणा दिया करते थे। यह दक्षिणा साधारणतः सामर्थ्यनुसार प्रदान किया जाता था परन्तु इतिहास साक्षी है की शिष्य अपने गुरु के मुँह से निकली हुई हर बात को आदेश मानते थे एवं कुछ भी दक्षिणा प्रदान करने से पीछे नहीं हटते थे। इसका सबसे बड़ा उदहारण एकलव्य हैं जिन्होंने गुरु के कहने मात्र से अपना अँगूठा काट कर उन्हें भेंट कर दिया था।

आधुनिक काल की बात करें तो अब शिष्य ना तो आश्रम में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करते हैं और ना ही गुरु उनसे प्राचीन काल जैसी दक्षिणा की अपेक्षा रखते हैं परन्तु आज भी गुरु का महत्व कम नहीं हुआ है और शिक्षा प्रदान करने वाले गुरु के सम्मान में शिष्य आज भी कई तरह से अपनी श्रद्धा का प्रदर्शन करते हैं।

मुखयतः गुरु पूर्णिमा आज भी आश्रमों में ही मनाई जाती है परन्तु कई विद्यालयों के छात्र भी अपने गुरुओं को सम्मानित करते हैं। आध्यात्मिक गुरुओं के आश्रम में सभी भक्त ब्रह्ममुहूर्त में यानि सुबह चार बजे जग जाते हैं और गुरु का ध्यान करते हुए प्रार्थना एवं मंत्रोच्चार करते हैं। तत्पश्चात दिन में गुरु के चरणों में पूजा अर्पण करते हैं। गुरु की पूजा के बाद साधू सन्यासियों की भी पूजा की जाती है एवं श्रद्धा भाव से उन्हें भोजन कराया जाता है।

गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल से ही मंदिरों में एवं आध्यात्मिक आश्रमों में सत्संग होते हैं एवं गुरु की महिमा का व्याख्यान किया जाता है। पूरे दिन मंदिरों एवं आश्रमों में भजन कीर्तन किया जाता है एवं गुरु की महिमा गान कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

घरों में, मंदिरों में एवं आश्रमों में गुरु वेद व्यास की पूजा की जाती है। वेद व्यास गुरु के साथ साथ अन्य गुरु स्वरुप इष्टदेवों की भी पूजा की जाती है। ब्रह्म भगवान, कृष्ण भगवान् , शिर्डी साईंबाबा के साथ साथ आदि शंकराचार्य, श्री रामानुजाचार्य, माधवाचार्य एवं अन्य हिन्दू गुरुओं की पूजा भी की जाती है।

जो लोग धार्मिक पूजा पाठ नहीं करना चाहते वे भी अपने गुरुओं को अलग अलग प्रकार से सम्मानित करते हैं। कुछ लोग अपने गुरु की लिखी हुई किताबें पढ़ते हैं तथा औरों को भी गुरु के ज्ञान से अवगत कराते हैं। कई लोग अपने गुरु का ध्यान करते हैं और शांत मन से उनकी दी हुई शिक्षा का मनन चिंतन करते हैं एवं किस तरह से उन शिक्षाओं को जीवन में उतार कर व्यवहारिक रूप से अपनाया जाए इस पर भी चिंतन करते हैं।

गुरु पूर्णिमा हमारे लिए तभी सार्थक हो सकती है जब हम गुरु से प्राप्त शिक्षा को अपने जीवन में उतारें। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की एवं उनकी दी हुई शिक्षा को याद कर बाकी दिन उन्ही शिक्षाओं के अनुसार जीवन में व्यवहार करें तभी गुरु पूर्णिमा का उद्देश्य पूर्ण हो सकता है।

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